Zoho और Arattai: भारत की टेक क्रांति की नई मिसाल

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Zoho की बढ़ती पकड़ और स्वदेशी टेक का दबदबा

Zoho ने हाल ही में सरकारी और PSU क्षेत्रों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी है।
IT मंत्री अश्विनी वैश्नव ने Zoho के ऑफिस सूट को अपनाते हुए एक स्वदेशी टेक आंदोलन को बल दिया।
Zoho के संस्थापक Sridhar Vembu ने कहा है कि कंपनी “Made in India” होने पर गर्व करती है और डेटा की सुरक्षा को सर्वोत्तम प्राथमिकता देती है।
Arattai का तेजी से उड़ान भरना

Zoho द्वारा विकसित मैसेजिंग ऐप Arattai हाल ही में बहुत चर्चा में रहा है।
एप स्टोर पर यह Social Networking श्रेणी में शीर्ष पर पहुँच गया।
तीन दिनों में नए साइन-अप में वृद्धि 3,000 से 3,50,000 प्रतिदिन हो गई।
Zoho CEO ने बताया कि उन्होंने ट्रैफ़िक की मांग को संभालने के लिए backend स्ट्रक्चर को मजबूत करने के काम तेज कर दिए हैं।

विशेषताएँ और योजनाएँ
Arattai की कुछ प्रमुख विशेषताएँ ये हैं:

डेटा और सुरक्षा: Vembu ने स्पष्ट किया कि भारत उपयोगकर्ता डेटा देश के भीतर ही होस्ट किया जाता है, और Zoho सार्वजनिक क्लाउड प्लेटफार्मों पर निर्भर नहीं है।
कम नेटवर्क स्थितियों में बेहतर काम करना — ग्रामीण व कमजोर कनेक्टिविटी क्षेत्रों में उपयोगी।
“Pocket feature” — जरूरी संदेश या जानकारी सहेजने की सुविधा।
संभव भविष्य: Arattai को UPI जैसी इंटरऑपरेबिलिटी देना ताकि वह WhatsApp जैसा बंद पारिस्थितिक तंत्र न बने।

चुनौतियाँ और आगे की राह

Zoho ने अपने $700 मिलियन का चिपमेकिंग प्रोजेक्ट फिलहाल निलंबित कर दिया है।
Arattai में अभी text messages पर end-to-end encryption नहीं है (लेकिन वॉइस और वीडियो कॉल में है)।
अचानक उछाल के कारण OTP ढिलाई और बुनियादी अवसंरचना दबाव झेल रही है।
वाट्सऐप और अन्य बड़े प्लेटफार्मों का प्रभुत्व चुनौती बना हुआ है।
Zoho ने यह निर्णय लिया है कि वह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध (IPO) नहीं होगा।

Vembu ने कहा कि हाल में Zoho के विरोध में फैलाई गई झूठी जानकारी को सही करना ज़रूरी था, और उन्होंने 5 मुख्य बिंदुओं में स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि Arattai किसी एकाधिकार (monopoly) बनने का इरादा नहीं रखता और वह खुले तंत्र की ओर जाना चाहता है।