19 सितंबर 2025 — झारखंड के हज़ारीबाग से निकलकर IIT बॉम्बे तक का सफर तय करने वाले उत्कर्ष कुमार ने एक ऐसी कहानी लिखी है जो लाखों के लिए प्रेरणा है। एक वक्त उनकी सैलेरी पैकेज ₹29 लाख सालाना थी, लेकिन उन्होंने देश सेवा का जुनून चुना और UPSC की तैयारी में लग गए। दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 55 हासिल कर IAS अफसर बनने का सपना साकार किया।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
उत्कर्ष झारखंड के हज़ारीबाग के निवासी हैं। उन्होंने DAV स्कूल से पढ़ाई की, आईआईटी-जेईई में टॉप रैंक हासिल की और IIT Bombay में कंप्यूटर साइंस में बी-टेक किया।
नौकरी और निर्णय
IIT के बाद उन्हें विदेशी कंपनी में सीनियर इंजीनियर के पद पर नौकरी मिली—₹29 लाख वार्षिक पैकेज के साथ। लेकिन देश सेवा और UPSC का जुनून ज्यादा था। उन्होंने उच्च पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और CIVIL SERVICES की तैयारी शुरू की।
पहला प्रयास असफल, दूसरा प्रयास कामयाब
पहले attempt में सफलता नहीं मिली, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने UPSC CSE 2021 में AIR 55 प्राप्त किया।
पारिवारिक समर्थन और प्रेरणा
उनके पिता जूनियर इंजीनियर हैं और मां शिक्षक। परिवार का पढ़ाई-पर्यावरण व समर्थन उनको आगे बढ़ने में मददगार रहा।
उद्देश्य और संदेश
उत्कर्ष का संघर्ष यह दिखाता है कि लक्ष्य बड़ा हो तो प्रतिष्ठित पैकेज भी कोई रोड़ा नहीं बन सकते। खुद पर विश्वास, कड़ी मेहनत और लक्ष्य-के प्रति समर्पण सफलता की कुंजी हैं।
यह उदाहरण है IIT छात्रों के लिए कि कितनी बड़ी नौकरी मिलने के बाद भी, अगर लक्ष्य मजबूत हो, तो उसके लिए जोखिम उठाया जा सकता है।
UPSC जैसे परीक्षा में लगातार प्रयास और समर्पण से सफलता मिलती है, चाहे शुरुआती प्रयासों में असफलता मिले।
