दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता का हाल बेहद चिंताजनक है। इस क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और धुंध ने सिर्फ दृश्यता नहीं बिगाड़ी है, बल्कि सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों — खासकर COPD — का खतरा भी तेजी से बढ़ा दिया है।
AQI की वर्तमान स्थिति
दिल्ली शहर में हाल-फिलहाल में AQI (Air Quality Index) ≈ 349 (Hazardous/खतरनाक श्रेणी में) दर्ज किया गया है।
PM2.5 स्तर भी ≈ 249.5 µg/m³ पर है, जो WHO की सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है।
COPD क्या है?
COPD यानी Chronic Obstructive Pulmonary Disease एक लंबी अवधि की फेफड़ों की बीमारी है जिसमें वक्त के साथ फेफड़ों की एयरवे सिकुड़ जाती है और सांस लेने में समस्या बढ़ जाती है। यह सिर्फ स्मोकर्स तक सीमित नहीं रहा — अब नॉन-स्मोकर्स में भी मिल रहा है।
क्यों बढ़ रहा है COPD का खतरा?
दिल्ली-एनसीआर में हवा इतनी जहरीली हो गई है कि बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
धूम्रपान करने वालों में COPD का जोखिम अधिक है।
लेकिन प्रदूषण-भरी हवा, उद्योगों से निकलने वाला धुआँ, निर्माण की धूल और बायोमास धुएँ ने नॉन-स्मोकर्स में भी COPD के मामले बढ़ा दिए हैं।
वर्तमान स्थिति क्या कह रही है?
हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सिर्फ बड़े शहरों में नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी प्रदूषण के कारण फेफड़ों की क्षमता कम हो रही है। दिल्ली-एनसीआर में लगभग हर तीसरा युवा व्यक्ति फेफड़ों में शुरुआती नुकसान का शिकार पाया गया है।
बचाव के कुछ उपाय
डॉक्टर से नियमित चेक-अप कराएं — खांसी, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
बाहर निकलते समय विशेष रूप से “N95/FFP2” मास्क पहनें।
घर में एयर प्यूरीफायर रख सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनमें पहले से फेफड़ों की समस्या है।
धूम्रपान या सिगरेट धुएँ से बचें।
प्रदूषण वाले दिनों में व्यायाम, दौड़ आदि कम करें।
दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषण-ग्रस्त इलाके में COPD और अन्य सांस संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। धूम्रपान, घरेलू धुएँ, बाहरी प्रदूषण — इन सभी का मिलाजुला असर हमारी फेफड़ों की सेहत पर पड़ रहा है।
अगर हम सब मिलकर प्रदूषण-नियंत्रण, धूम्रपान-निरोध और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं, तो इन खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भारत में COPD मामलों में बड़ी बढ़ोतरी — आँकड़ों में दिखा डरावना ट्रेंड
पिछले कुछ वर्षों में भारत में COPD के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक:
- पूरे देश में COPD मामलों में लगभग 20–25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- प्रदूषण-प्रभावित शहरों (Delhi-NCR, Kanpur, Lucknow, Kolkata) में यह वृद्धि 30–40% तक देखी गई है।
- बच्चों और युवाओं में “early lung damage” के मामलों में लगभग 18% की वृद्धि हुई है।
- सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में OPD में आने वाले सांस-की-बीमारी के रोगियों में 35% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- अस्पतालों में एडमिशन होने वाले acute respiratory cases में 25–30% तक उछाल आया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि सिर्फ स्मोकिंग की वजह से नहीं, बल्कि PM2.5 प्रदूषण, धूल, धुआँ और industrial emissions के कारण हो रही है।
क्यों दिख रहा है इतना बड़ा उछाल?
- दिल्ली-NCR के एयर पॉल्यूशन लेवल पिछले महीनों में WHO की सुरक्षित सीमा से 20–25 गुना अधिक रहे
- AQI लगातार 300–400 (Severe category) में बना रहा
- PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों में गहराई तक जाकर long-term नुकसान करते हैं
यह सभी कारण COPD के रोगियों में अचानक बढ़ोतरी की बड़ी वजह बन रहे हैं।
