20 सितंबर 2025 — Microsoft ने उन भारतीय और अन्य विदेशी कर्मचारियों को जो H-1B या H-4 वीजा पर हैं, नई अमेरिका सरकार की नीति से पहले तुरंत वापस लौटने की सलाह दी है। इस नीति के अनुसार 21 सितंबर, 2025 से H-1B वीजा धारकों की फीस सालाना $100,000 कर दी जाएगी, जो कि अभी की फीस से बहुत अधिक है। इस बदलाव के मद्देनज़र Microsoft ने अपनी आंतरिक टीम को स्पष्ट संदेश भेजा है कि जो कर्मचारी यूएस के बाहर हैं, उन्हें जल्द से जल्द अमरीका आ जाना चाहिए।
क्या है नई नीति और इसका असर
- नई कार्यवाहियों के तहत, प्रत्येक कंपनी को उन कर्मचारियों की फीस उठानी होगी जो H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं। यह लागत अब $100,000 प्रति वर्ष होगी।
- Microsoft ने अपनी चेतावनी में कहा है कि जो कर्मचारी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भारत या अन्य देशों में हैं, उन्हें वापस आने की योजना बनानी चाहिए, क्योंकि आने-जाने में मुश्किल हो सकती है।
- साथ ही, कंपनी ने जिन कर्मचारियों ने यात्रा की योजना बनाई थी, उन्हें फिलहाल यूएस में बने रहने की सलाह दी है।
भारतीय कर्मचारियों और टेक सेक्टर पर प्रभाव
- भारत में काफी संख्या में इंजीनियर और डेवलपर्स इस H-1B वीजा कार्यक्रम पर काम करते हैं; इस शुल्क वृद्धि से उनकी नौकरी या काम की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
- छोटे-मध्यम टेक व्यवसायों को सबसे ज़्यादा दबाव होगा क्योंकि बड़ी कंपनियों के पास ये खर्च संभालने की क्षमता ज़्यादा हो सकती है।
- कंपनियों और वीजा धारकों दोनों को अब नए नियमों के अनुसार वीजा renewal, यात्रा और निवास की योजनाएँ पुनः बनानी पड़ेंगी।
Microsoft की सलाह
इसके अलावा, कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे फिलहाल अंतर-राष्ट्रीय यात्रा से बचें, विशेषकर यदि यात्रा की वजह से वीजा नवीनीकरण या पुनः प्रवेश में समस्या हो सकती हो।
Microsoft ने सुझाव दिया है कि जो H-1B / H-4 कर्मचारी इस समय भारत या अन्य देशों में हैं, वे जल्द से जल्द यात्रा की व्यवस्था करें ताकि नई नीति लागू होने से पहले सामयिक स्थिति सुनिश्चित हो सके।
