दिल्ली सरकार ने अस्पतालों को कफ सिरप संबंधी केंद्रीय सलाह का पालन करने कहा

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दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे केंद्र की रोकथाम संबंधी सलाह (rational use advisory) का सख्ती से पालन करें।
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि अस्पतालों के मेहराब, विभागाध्यक्ष और निदेशन को यह सुनिश्चित करना है कि सलाह “letter and spirit” लागू हो।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की 3 अक्टूबर की सलाह के अनुसार, कफ और जुकाम की दवाएँ 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए
इसके अलावा, 2 से 5 वर्ष की आयु वाले बच्चों को ऐसी दवाएँ केवल डॉक्टर की स्पष्ट देखरेख में दी जानी चाहिए।

इस कदम की पृष्ठभूमि में हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौतों की घटनाएँ हैं, जिनके कारण राष्ट्रीय स्तर पर सतर्कता बढ़ गई है।


मध्य प्रदेश: जहरीले कफ सिरप की वजह से मौतों का मामला गंभीर

हादसे की जानकारी

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक विवादित कफ सिरप के सेवन के कारण 14 मासूम बच्चों की मौत हो गई है।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह “Coldrif” नामक सिरप था जिसे संदिग्ध सामग्री मिली है।
इस सिरप में diethylene glycol (DEG) नामक जहरीला रासायनिक घटक पाया गया, जो लीवर और गुर्दों को प्रभावित कर सकता है।

प्रशासन की कार्रवाई

मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत Coldrif सिरप पर राज्य स्तर पर प्रतिबंध लगा दिया।
साथ ही, ड्रग कंट्रोलर सहित कई अधिकारियों को सस्पेंड या ट्रांसफर कर दिया गया है।
मामले की जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) गठित की गई है।
अब तक, 157 बोतलें इस सिरप की छिंदवाड़ा में बेची जा चुकी पाई गई हैं, और कई बोतलें जब्त की गई हैं।

राजनीतिक और सामाजिक दबाव

कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग की है।
इस बीच, NHRC ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किए हैं कि बच्चों की मौतों की योजना से जांच हो और दोषी पाए जाएँ।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने डॉक्टरों की गिरफ्तारी को आलोचना की है और कहा है कि जिम्मेदारी निर्माता एवं अधिकारियों पर है।


क्यों यह मामला हाइलाइट किया जा रहा है?

  1. राष्ट्रीय अलार्म — बच्चों की जान चली जाना बेहद संवेदनशील और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की चेतावनी है।
  2. देशव्यापी नीति असर — इस घटना के कारण केंद्र सरकार ने जल्द ही सलाह जारी की और राज्यों को किफायती उपयोग की गाइडलाइन दी।
  3. विश्वसनीयता पर सवाल — यह मामला भारतीय दवा विनियमन और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की कमज़ोरी को उजागर करता है।
  4. सत्तात्मक दबाव — राज्य सरकारों पर राजनीतिक दबाव है, और जनता जानना चाहती है कि कैसे यह हादसा हुआ।

सुझाव और उपाय

दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए।
केंद्र और राज्य स्तर पर सभी अस्पतालों में कफ सिरप की निगरानी और उपयोग नीति को कड़ाई से लागू करना चाहिए।
दवाओं की नियमित गुणवत्ता जांच और दोषपूर्ण बैचों की त्वरित रॉलबैक (recall) ज़रूरी है।
जनता को जागरूक करना चाहिए कि हल्की खांसी में बिना डॉक्टर सलाह के दवाएँ न लें।
जमीनी स्तर पर दवा नियंत्रण विभाग, विभागीय अस्पताल, और नियंत्रक कार्यालय में तालमेल बढ़ाना चाहिए।