बिहार में विधानसभा चुनाव की हलचल बढ़ गई है। अभी तक तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, आयोग अक्टूबर या नवंबर 2025 में चुनाव करा सकता है। इस बार 243 सीटों पर मतदान होगा। किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 122 सीटें जीतनी होंगी।
मतदाता सूची में बड़े बदलाव
चुनाव आयोग ने बिहार में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट किया है। इस दौरान:
- 21.53 लाख नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया।
- 3.66 लाख से अधिक नामों को सूची से हटाया गया।
- लगभग 6,000 लोगों को नागरिकता संबंधी कारणों से हटाया गया।
- कुल मतदाताओं की संख्या अब करीब 7.42 करोड़ हुई।
- इस प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं और मामला Supreme Court में चल रहा है।
यह कदम चुनाव को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश है, लेकिन इससे राजनीतिक विवाद भी तेज हुए हैं।
पर्यवेक्षकों और आयोग की भूमिका
चुनाव आयोग ने बिहार चुनावों में 470 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात करने का फैसला लिया है।
इनमें 320 IAS, 60 IPS, और शेष अन्य अधिकारियों की तैनाती होगी।
ये पर्यवेक्षक पूरे चुनाव प्रक्रिया पर निगरानी रखेंगे और आयोग को रिपोर्ट करेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें “लोकतंत्र के प्रकाशस्तंभ” करार दिया है और कहा है कि उन्हें निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की महत्वपूर्ण जानकारी
मुख्य राजनीतिक दल: JDU, BJP, RJD, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां (CPI, CPIML), जन सुराज पार्टी, LJP (राम विलास-चिराग पासवान गुट), RLJP (पशुपति पारस गुट), AIMIM, HAM, VIP
कुल सीटें: 243
SC रिजर्व सीट: 38
ST रिजर्व सीट: 2
कुल पंजीकृत मतदाता: 7,42,00,000
पुरुष मतदाता: लगभग 3,92,70,804
महिला मतदाता: लगभग 3,49,82,828
चुनाव की संभावित तिथि: अक्टूबर-नवंबर, 2025
85 वर्ष से ऊपर के वोटर: 4,03,985
18 से 19 साल के नए वोटर: 14,01,050
दिव्यांग मतदाता: 7,20,709
थर्ड जेंडर मतदाता: 17,254
ड्राफ्ट रोल से बाहर: 65,64,075
फाइनल वोटर लिस्ट से बाहर: 3,66,742
दावा और आपत्ति के दौरान जुड़े नाम: 21,53,343
राजनीतिक समीकरण और गठबंधन अधर में
महागठबंधन का दबाव
वामपंथी दलों (CPI, CPI-M) ने महागठबंधन से 35 सीटों की मांग की है और साथ ही तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में घोषित करने की अपील की है।
RJD ने यह घोषणा की है कि वे चुनाव मुख्यमंत्री चेहरे के बिना नहीं लड़ेंगे।
हालाँकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और सीट बंटवारे पर बातचीत जारी है।
JDU से पलायन
चुनाव से पहले JDU को झटका लगा है। विधायक संजय कुमार JDU छोड़कर RJD में शामिल होंगे।
इस कदम से RJD को परबत्ता क्षेत्र में बढ़त मिलने की संभावना है।
NDA रणनीति
NDA में भाजपा और JDU के बीच सीट बंटवारे की कवायद तेज है।
Nitish Kumar और अमित शाह की हालिया बैठक में इस विषय पर बातचीत हुई है।
भाजपा ने अपनी चुनाव गतिविधियों के लिए एक 45 सदस्यीय “खिलाड़ियों की टीम” भी घोषित की है।
तीसरा मोर्चा — जन सुराज पार्टी (Prashant Kishor)
प्रशांत किशोर की Jan Suraaj Party (JSP) ने कड़ी घोषणा की है कि वह सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी
उन्होंने JDU को बड़ी चुनौती दिए जाने की भविष्यवाणी की है।
चुनावी रणनीतियाँ और मुद्दे
- महागठबंधन अब उन सीटों पर ध्यान दे रहा हैं जो पहले बहुत कम मतों से गवाई थीं।
- जाति समीकरण, युवाओं की उम्मीदें और बेरोजगारी इस चुनाव के अहम विषय बने हुए हैं।
- बिहार–नेपाल सीमा विवाद और वहाँ की राजनीतिक हलचल का भी असर स्थानीय सीटों पर पड़ने की संभावना है।
- इस बार कई नए दलों ने भी चुनावी मैदान में कदम रखा है, जिससे राजनीतिक समीकरण और पेचीदा हो गया है।
- मीडिया एवं प्रचार में भोजपुरी फिल्म तारकों की भागीदारी भी बढ़ी है, कुछ लोग सीधे चुनाव लड़ेंगे जबकि कुछ अभियान में शामिल होंगे।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ
- SIR प्रक्रिया पर उठाए गए आरोप मतदाताओं के बीच अविश्वास बढ़ा सकती है।
- गठबंधन टूटने की आशंका हमेशा बनी हुई है, खासकर जब सीट-बंटवारे पर अंतिम सहमति नहीं बनी हो।
- तीसरे मोर्चे की एंट्री से वोट विभाजन हो सकता है और यह बड़ा wildcard साबित हो सकती है।
- चुनाव आयोग और पर्यवेक्षकों की सक्रियता चुनाव की विश्वसनीयता बढ़ा सकती है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राजनीतिक दृष्टि से एक निर्णायक मोड़ होगा।
राजनीतिक दलों की रणनीति, मतदाता सूची की स्वच्छता, गठबंधन की मजबूती और तीसरे मोर्चे की भूमिका—यह सब मिलकर स्वरूप तय करेंगे कि अगली सरकार किसकी बनेगी।
