उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आयोजित हो रहे नौवें दीपोत्सव के अवसर पर योगी आदित्यनाथ को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल देखा गया, जिन्होंने भव्य रोशनी-प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शंख-दीप श्रृंखला के बीच भगवान राम का प्रतीकात्मक राजतिलक (राज्याभिषेक) किया। इस आयोजन को “विश्वसनीय आस्था-उत्सव” तथा “विश्व रिकॉर्ड प्रयास” के रूप में देखा गया है।
इस साल लगभग 26.17 लाख दीप (≈2,617,215 मिट्टी के दीये) घाटों, गलियों तथा सार्वजनिक स्थानों पर सजाकर जलाए गए — और यह नया Guinness World Records रिकॉर्ड है।
कार्य में लगभग 33,000 स्वयंसेवक (वॉलंटियर्स) शामिल हुए, जिन्होंने दीप प्रज्ज्वलन-तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रणाम करते हुए कहा कि उन्होंने “शताब्दियों पुराने स्वप्न को सच” कर दिखाया है, और अयोध्या को फिर से आस्था का केंद्र बनाया है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा: “जहाँ कभी गोलियाँ चली थीं, आज वहाँ दीप जल रहे हैं।” यह वक्तव्य उन्होंने अयोध्या को विकास-विरासत का प्रतीक बताते हुए दिया।
राजतिलक समारोह में राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की पूजा-अर्चना, आरती और माल्यार्पण हुआ। वहाँ हजारों संत-महंत, धर्मप्रवर्तक व श्रद्धालु मौजूद थे।
इस अवसर पर दीपोत्सव को सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक-पर्यटनात्मक आयोजन के रूप में देखा गया है, जिसमें रामायण-थीम, ड्रोन-लाइट शो, लोक-नृत्य-संगीत तथा विश्वसहभागी कलाकारों की भागीदारी रही।
आयोजन का महत्व
यह आयोजन केवल एक दीप-प्रज्वलन समारोह नहीं है, बल्कि यह अयोध्या की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्संपादित करने का एक प्रयास है। 500 सालों से चले आ रहे संघर्ष, आस्था की रक्षा और विरासत के पुनरुत्थान को इस तरह मंच मिला है कि यूँ लगता है जैसे फिर से ‘त्रेता-युग’ जीवंत हो उठा हो – ऐसा प्रभाव कई मीडिया रिपोर्ट्स में देखने को मिला।
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