गुटखा-सिगरेट-पान मसाला होंगे महंगे! सरकार संसद में लाएगी दो नए बिल

गुटखा व पान मसाला पर टैक्स के लिए दो नए विधेयक, GST 28 से बढ़ाकर 40 फीसदी होगा गुटखा व पान मसाला पर टैक्स GST 28 से बढ़ाकर 40 फीसदी होगा

नई दिल्ली — केंद्र सरकार ने तैयार किया है एक बड़ा आर्थिक कदम: गुटखा, पान मसाला और सिगरेट जैसे तंबाकू व तंबाकू-संलग्न उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने के लिए दो नए बिल संसद में पेश करने की तैयारी चल रही है। इन बिलों — Central Excise (Amendment) Bill, 2025 और Health Security se National Security Cess Bill, 2025 — को आगामी शीतकालीन सत्र की शुरुआत में प्रस्तावित किया जाएगा।

क्या है नया टैक्स प्लान

सिर्फ पैकेज्ड उत्पाद नहीं — बल्कि निर्माता, मशीन और उत्पादन प्रक्रिया (manufacturing capacity) पर भी cess लगाने की योजना है। इस तरह अनियंत्रित, छोटे या ग्रे-जोन्स में काम करने वाले गुटखा/पान-मसाला उत्पादन यूनिट्स को टैक्स व पंजीकरण के दायरे में लाया जाएगा।
वर्तमान में गुटखा/पान मसाला/सिगरेट पर 28% जीएसटी + कंपनसेशन सेस लागू है। प्रस्तावित संशोधन के बाद, टैक्स ढांचा बदल जाएगा: 40% GST रहेगा, और उसके ऊपर नई सेस या उत्पाद शुल्क (excise duty / cess) लगाई जाएगी।

तंबाकू उत्पादों पर 70% तक सेस लगाने की तैयारी है, ताकि GST काउंसिल की दर बढ़ाने के बाद भी सरकार की राजस्व व स्वास्थ्य-वित्तीय ज़रूरतें पूरी हो सकें।

क्यों किया जा रहा है ये कदम

सरकार का कहना है कि यह फैसला जनस्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी है। तंबाकू व पान मसाले से होने वाले स्वास्थ्य-खर्च, एडिक्शन और अवैध व्यापार को नियंत्रित करने के लिए टैक्स और सेस बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
साथ ही, जैसा कि पहले से GST कंपनसेशन सेस लागू था, उसकी अवधि अब समाप्त हो रही है। सेस हटने के बाद यदि टैक्स नहीं बढ़ाया गया, तो सरकार को राजस्व घाटा हो सकता था। इसीलिए नए बिल के ज़रिए टैक्स-बोझ बनाए रखने की तैयारी है।

असर — कीमतों व खपत पर

  • इस बिल के लागू होते ही गुटखा, पान मसाला व सिगरेट की कीमतों में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
  • न सिर्फ ब्रांडेड कंपनियों के पैक — बल्कि लोकल, छोटे और गोल बाजार (unorganized / loose sale) के उत्पाद भी महंगे होंगे।
  • अनुमान है कि रोज़ाना/नियमित उपयोग करने वालों के लिए खर्च बढ़ जाएगा — जिससे इस तरह के उत्पादों की खपत घटने की संभावना है।

सरकार व स्वास्थ्य-कर्मी क्या कह रहे हैं

सरकार का उद्देश्य है कि “sin goods” पर टैक्स ऊँचा हो ताकि न सिर्फ सरकार को राजस्व मिले, बल्कि तंबाकू–निर्मूलन (tobacco control) में मदद मिले। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस कदम का स्वागत किया है — उनका कहना है कि महंगा होने पर युवा और गरीब वर्ग में तम्बाकू व तंबाकू-संलग्न उत्पादों की खपत कम हो सकती है।

सरकार का दावा है कि नई सेस से मिले राजस्व से स्वास्थ्य बजट और सुरक्षा खर्चों को मजबूत किया जाएगा।

क्या चुनौतियाँ हो सकती हैं?

  • तंबाकू उत्पाद पूरी तरह बंद नहीं होंगे, बल्कि काले बाजार (black market) में उत्पादन व बिक्री बढ़ने का खतरा है।
  • छोटे विक्रेता और असंगठित क्षेत्र (loose gutkha / pan masala sellers) महंगाई व टैक्स दबाव का बोझ झेल सकते हैं।
  • टैक्स बढ़ाने से सरकार को राजस्व मिलेगा, लेकिन उससे कर चोरी, smuggling, टैक्स चुकाने से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।

गुटखा, पान मसाला और सिगरेट पर बढ़ाए जाने वाले टैक्स व सेस — सरकार का एक अहम कदम है, जो न सिर्फ राजस्व बढ़ाएगा बल्कि तंबाकू-विरोधी नीति को भी मजबूत करेगा। लेकिन इसके साथ ही यह देखना होगा कि सरकार नियंत्रण, पंजीकरण और कानूनी निगरानी पर कितना प्रभावी कदम उठाती है, ताकि टैक्स-निगरानी के साथ स्वास्थ्य-हित भी सुनिश्चित हो सके।