भारत के माओवादी आंदोलन को झटका मिला है। आंध्र प्रदेश के मारेदुमिली जंगल में सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में पकड़े गए या मारे गए मडवी हिडमा, जिसे लंबे समय से देश के सबसे खतरनाक माओवादी कमांडरों में माना जा रहा था।
हिडमा कौन था?
मडवी हिडमा — जिसे हिडमालू या सन्तोष भी कहा जाता था — कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) की पीएलजीए (लोगों की मुक्ति गोरिल्ला सेना) में एक प्रमुख रणनीतिकार था। उसने छत्तीसगढ़-अंध्र सीमा के दंडकारण्य क्षेत्र में कई सालों तक छुप कर काम किया।
उसकी गतिविधियाँ और वारदातें
- उसने कम-से-कम 26 घातक हमलों की योजना बनाई थी और उन्हें अमल में भी लाया था।
- छिपने-छुपाने में माहिर था, स्थानीय लोगों में सहारा रखता था, और जंगल रणनीतियों में पारंगत था।
इस गिरफ्तारी/मुठभेड़ की अहमियत
सुरक्षा बलों की इस सफलता से माओवादी आंदोलन को बड़ी चोट लगी है। यह एक संकेत है कि केंद्र सरकार-राज्य सरकारें माओवादी समस्या को हल करने में तेजी ला रही हैं। इससे जंगल इलाकों में रह रह कर खतरा बढ़ा कर झेलने वाले आम लोगों को राहत मिल सकती है।
इस बड़ी कामयाबी के बाद सरकार को अब माओवादी नेटवर्क के ऊपरी स्तर-तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी है। साथ ही, जंगल इलाकों में सूचनात्मक अभियान, पुनर्वास योजना, निगरानी बढ़ाना अहम हो जाएगा।
