बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है और इसके साथ ही आगामी मंत्रिमंडल को लेकर बैठकों का सिलसिला भी लगातार जारी है। नीतीश कुमार के एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी लगभग तय मानी जा रही है। इस बार वे दसवीं बार राज्य की बागडोर संभालने जा रहे हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा।
NDA में सीट बंटवारे पर सहमति
सूत्रों के मुताबिक, NDA गठबंधन के अंदर मंत्रियों के विभाग और संख्या को लेकर लगभग खाका तैयार कर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार—
- LJP (रामविलास) को करीब 3 मंत्री पद मिलने की संभावना है।
- HAM (S) और RLSP/कुशवाहा गुट को 1-1 पद दिए जा सकते हैं।
- वहीं JDU और BJP अपनी ताकत के अनुसार अधिकतर विभाग अपने पास ही रखेंगे।
गठबंधन सूत्रों का कहना है कि संख्या-बल और पिछले चुनावी योगदान को ध्यान में रखते हुए सीटों का बंटवारा किया जा रहा है।
पुराने चेहरों की वापसी, साथ में 5–6 नए मंत्री भी
नए मंत्रिमंडल में जहां कई वरिष्ठ नेताओं को दोबारा शामिल किए जाने की तैयारी है, वहीं कुछ नए चेहरों को पहली बार जिम्मेदारी मिलने की भी बात सामने आ रही है। अनुमान है कि 5 से 6 नए चेहरे कैबिनेट में जगह बना सकते हैं।
इससे सरकार में अनुभव और ताजगी — दोनों का मिश्रण दिखने की उम्मीद है।
शपथ-ग्रहण समारोह 20 नवंबर को
पटना के गांधी मैदान में 20 नवंबर को भव्य शपथ-समारोह की योजना है। समारोह में केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
इसके पहले 19 नवंबर को विधानसभा सत्र समाप्त किए जाने की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर चल रही है।
नई सरकार के सामने चुनौतियाँ
बिहार की नई सरकार के सामने कई अहम चुनौतियाँ होंगी—
- कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना
- नौकरशाही में जवाबदेही बढ़ाना
- बेरोजगारी और उद्योग निवेश को लेकर ठोस कदम
- शिक्षा व स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की यह नई संरचना तभी सफल होगी, जब सरकार शुरुआती महीनों में ही ठोस फैसले लेगी और जनता को बदलाव का भरोसा दिलाएगी।
